वैसे तो चिड़ावा आजकल राजस्थान में सुर्खियां बटोर रहा है। वह चाहे सरकारी अस्पताल प्रकरण हो या चिड़ावा पंचायत समिति प्रधान इंद्रा डूडी का त्याग पत्र हो। इस लेख में पंचायत समिति प्रधान इंद्रा डूडी के नाटकीय ढंग से दिये गये त्याग पत्र से पहले इस बात पर भी चर्चा जरुरी हो जाती है कि क्या प्रधान के चुनावों में खरीद फरोख्त नहीं होती। आजकल पंचायत के सरपंच और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनावों में खरीद फरोख्त का खुला खेल देखने को मिलता है। इंद्रा डूडी कांग्रेस के टिकट पर प्रधान नियुक्त हुई थी। उनका कार्यकाल बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा। इंद्रा डूडी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया लेकिन जैसे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झुन्झुनू के एक भाजपा नेता ने इसमे सहयोग किया व अविश्वास प्रस्ताव निरस्त हो गया, तत्पश्चात इंद्रा डूडी ने उसी भाजपा नेता के घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा में जाने का ऐलान भी किया। उनके विरोधियों ने इस प्रकरण के बाद भी इंद्रा डूडी का पीछा नहीं छोड़ा व अनियमितता को लेकर राज्य सरकार से शिकायत कर प्रधान पद से बर्खास्त होना पड़ा। एक बहुत ही नाटकीय ढंग से रोहतास धागड़ को प्रधान की कुर्सी मिली लेकिन उनके प्रधान पद के मनोनयन में झुंझुनूं विधायक राजेन्द्र भांभू की उपस्थिति से उन अटकलों को हवा मिली कि भाजपा में आज भी गुटबाजी चरम पर है। प्रधान इंद्रा डूडी ने उनके खिलाफ अनियमितताओ को लेकर सरकार से उच्च स्तरीय जांच करवाने की गुहार लगाई। उस जांच में प्रधान इंद्रा डूडी को पाक साफ बताते हुए पुनः प्रधान की कुर्सी सौपी, जो इस बात की और इशारा थी कि क्या वह जांच गलत थी, जिसको लेकर उन्हें बर्खास्त किया गया। पद ग्रहण करने के बाद प्रधान इंद्रा डूडी ने अपना त्याग पत्र दिया और उसे स्वीकार भी कर लिया गया। तत्पश्चात इंद्रा डूडी ने मिडिया के सामने रूबरू होकर अपना पक्ष रखा कि पंचायत समिति में उनके पश्चात नियुक्त प्रधान के कार्यकाल मे हुए कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों को लेकर उन्होंने जांच होना भी बताया। अब यह तो जांच रिपोर्ट आने पर ही पता लगेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंद्रा डूडी ने झुन्झुनू विधायक को भी लपेटा, जो भाजपा की खेमेबंदी की और इशारा कर रही है, जिसको लेकर बार बार मेरे लेखों मे इस बात को उजागर भी किया गया है। इंद्रा डूडी ने जो स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए त्याग पत्र दिया लेकिन यह बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके हाव-भाव व आक्रामक तेवर देखकर उनकी यह बात हजम नही होती। अब यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा कि चिड़ावा में क्या राजनीतिक समीकरण बनते हैं और इंद्रा डूडी की क्या भूमिका होती है।
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