पाकिस्तान इन दिनों एक ही सवाल में उलझा है। इमरान खान कहाँ हैं और क्या वे ठीक हैं। उनके बेटे क़ासिम खान ने खुलकर कहा है कि पिछले कई सप्ताह से परिवार को न तो कोई मुलाकात मिली, न फोन, न ही कोई फोटो या वीडियो, इसलिए जब तक कोई सबूत नहीं मिलता, वह अपने पिता की स्थिति पर भरोसा नहीं कर सकते। सरकार दावा करती है कि इमरान खान स्वस्थ और सुरक्षित हैं, परंतु यह दावा सिर्फ़ शब्दों में है; कोई दृश्य प्रमाण अब तक नहीं दिया गया। यही अस्पष्टता पूरे देश में आग की तरह फैल गई। सोशल मीडिया पर हत्या की अफवाहें उठीं, जेल के बाहर उनकी बहनों को धक्का दिया गया और खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री तक को पुलिस ने पीट दिया। इस माहौल ने एक बड़ा संकेत दिया है कि संकट इमरान खान का कम, पाकिस्तान के लोकतंत्र और पारदर्शिता का ज्यादा है। जब राज्य अपने ही नागरिकों को सत्य नहीं दिखाता, तो अफवाहें ही सच बन जाती हैं और आज पाकिस्तान उसी अविश्वास की आग में जल रहा है। एक ही मांग के साथ इमरान खान का सबूत दिखाओ। यही वह सत्य है, जिसने पाकिस्तान को अस्थिर, बेचैन और संदेह से भर दिया है।
*@ रुक्मा पुत्र ऋषि*