सीकर जिले के नेछवा स्थित बावरी मोहल्ले से एक ऐसा विडियो देखने को मिला कि एक ज्वलंत प्रश्न सभ्य समाज के समक्ष खड़ा हो गया कि आखिर जानवर कौन है ? सूत्रों की मानें तो एक बेसहारा नंदी ने बारात की गाड़ी के टक्कर मार दी, इसको लेकर उन दरिंदों ने उस नंदी को बोलेरो की टक्कर मारकर उसके सिर पर गाड़ी चढ़ा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वहां महिलाएं उसको बचाने की गुहार लगाती रही लेकिन उनकी दरिंदगी के तांडव के नीचे उनकी जुबान दबकर रह गई। उन्होंने बेरहमी से गाड़ी के नीचे कुचलकर नंदी की हत्या कर दी। ऐसा वाकया देखकर एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा होता है कि आखिर हमारी मानवीय संवेदनाएं शुन्य क्यों हो रही है। इस दुखद व अमानवीय घटना को लेकर लोगों में रोष है व कुछ अपराधियों को पुलिस के पकड़ने के समाचार भी है। गौ रक्षक दलों ने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया कि हत्यारो को फांसी की सजा दी जाए लेकिन अब सवाल उठता है कि शेखावाटी क्षेत्र में इतनी गोशाला संचालित है तो गौवंश आखिर बेसहारा क्यों है ? जैसा जन आंदोलन आज गौ सेवको ने किया यदि ऐसा ही एक जन आंदोलन इस बात को लेकर किया जाए कि बेसहारा गौवंश को आसियाना मिले। वैसे हमारे सभ्य समाज की संवेदनशीलता चेतन शून्य हो गई, जब अपने भाई को ही गाड़ी के नीचे कुचलकर मार दिया जाता है तो यह तो एक बेजुबान प्राणी था। आखिर इन गौवंश को असहाय व बेसहारा करने में भी हमारा ही कहीं न कहीं योगदान रहा है। जब तक गाय दूध देती है, नंदी को रखा जाता है तत्पश्चात उसको पिकअप में डालकर शहर या दूसरे गांव में छोड़ दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी गौशालाएं गौवंश को लेने से मना करती है, कुछ गौशालाएं गौवंश की सेवा को पूर्ण रूप से समर्पित है तो क्यों न उन नंदी या गौवंश को बेसहारा छोड़ने की बजाय उन गौशालाओं के सुपुर्द कर दिया जाए। इसी क्रम में जो गौसेवक इस घटना को लेकर आक्रोशित हैं, उनका भी नैतिक दायित्व बनता है कि उन बेसहारा गौवंश को आसियाना दिलाने की मुहीम चलाई जाए, जिससे ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। जिला कलेक्टर डॉ.अरूण गर्ग बेसहारा गौवंश को लेकर बहुत ही संवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं। उनके अनुसार इन बेसहारा गौवंश को आसियाना देने के लिए एक कार्य योजना बनाई गई है, जिसके परिणाम धरातल पर एक माह में देखने को मिलेंगे। उनके अनुसार जिले में 18 नगर पालिकायें है और एक नगर पालिका का चयन कर उसको बेसहारा गौवंश से मुक्त करवाने का संकल्प है तत्पश्चात यह कार्य योजना अन्य नगर पालिकाओ में लागू की जायेगी। इसके लिए जन सहभागिता की बहुत जरूरत है। जिला कलेक्टर ने भी उसी बात को उजागर किया है, जिसका आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) अपने लेखों में करता आया है। गौ रक्षक दल के सदस्यों की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि इस मामले में दलित राजनीति से उपर उठकर गौवंश की सेवा के लिए तत्पर रहे कि बेसहारा गौवंश को आसियाना कैसे मिले। यदि स्थानीय गोशालायें व स्थानीय नगर पालिका प्रशासन इसमें सहयोग नहीं करता है तो इसको लेकर जिला प्रशासन के संज्ञान में लाने का काम करें।
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