नई दिल्ली/काठमांडू: अखिल भारतीय महर्षि वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद के प्रचारी महंत गुरुजी राजू चंदेल ने नेपाल सरकार और वहाँ की नीतियों पर कड़ा रुख अपनाया है।
*गौ माता, मातृभूमि और आत्मा का प्रश्न*
महंत राजू चंदेल ने कहा कि नेपाल की भूमि पर खुलेआम गौ-वध के वीडियो बनाए जा रहे हैं और विडंबना यह है कि गौ-भक्षक को लोकतंत्र में गृह मंत्री पद पर बैठा दिया गया है। उन्होंने प्रश्न उठाया—“क्या मातृभूमि और गौ माता से भी बड़ा कोई पद या प्रतिष्ठा हो सकता है ? नेपाल की जनता और गोरखा समाज इस अन्याय पर मौन क्यों हैं ?”
*गौ माता राष्ट्र की आत्मा हैं*
महंत चंदेल ने भावुक अपील करते हुए कहा—“गौ माता केवल पशु नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की आत्मा हैं। जो लोग बीफ खाते हैं, वे सिर्फ एक जीव को नहीं मारते, वे अपनी ही सभ्यता और आत्मा को चोट पहुँचाते हैं।” उन्होंने कहा कि गौ माता को मूक प्राणी कहना भूल है, क्योंकि उनमें वही चेतना है, जो मनुष्य में है। उनकी पीड़ा हर संवेदनशील हृदय को झकझोर देती है।
*गोरखा और गोरक्षा का प्रश्न*
महंत चंदेल ने गोरखा समाज को भी सीधा संदेश दिया—“गोरखा का अर्थ ही गोरक्षा है। यदि गोरखा स्वयं गौ माता की रक्षा नहीं कर सकता, तो उसे गोरखा कहलाने का क्या औचित्य है ? सच्चा गोरखा वही है जो किसी से न डरे—पर क्या वह अपनी ही माँ (गौ माता) का दर्द देखकर भी मौन रह सकता है ?”
*धर्म का संकल्प*
महंत चंदेल ने कहा—“कलियुग में धर्म के भीतर भी अधर्म प्रवेश करेगा, लेकिन मेरा कर्तव्य है कि मैं सत्य बोलूँ। गौ माता के सम्मान, मानवता और प्रकृति की रक्षा के लिए मेरी लेखनी, मेरी वाणी और मेरा संकल्प ही मेरा उत्तर है।”
*पशुपतिनाथ मंदिर हेतु विशेष वक्तव्य*
महंत गुरुजी राजू चंदेल ने आगे जोर देकर कहा—“नेपाल में गौ हत्या के विरोध में, जहाँ महादेव का नंदीजी विराजमान है, वह पुण्य स्थान पशुपतिनाथ मंदिर है। मानव उस मंदिर स्थल को निर्जीव भले ही माने, परंतु करोड़ों सनातन हिंदुओं की भावना भगवान शिव से जुड़ी है।” महंत जी ने कहा—“भला मानव कितना धूर्त है कि ऐसी अपार शक्ति होते हुए भी गाय एवं नंदी के खिलाफ में अपने अंदर एक गौ हत्या की भावना वाला दूसरा चरित्र जीवित न करे। अगर दूसरा चरित्र जीवित करना है तो गोरखनाथ का कहा हुआ शब्द 'गौ रक्षा' का दूसरा चरित्र पैदा करें, न कि शरीर को दुःख देने वाला, रक्त बलि या रेड मीट बीफ आदि की भावना पैदा करने वाला। गौ-भक्षकों का शांति से विरोध करना चाहिए, चाहे वह मोमबत्ती द्वारा ही क्यों न हो।” उन्होंने स्पष्ट किया कि—“इस समय राजनीति और आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, परंतु मेरा संदेश यह है कि लोकतांत्रिक मायनों के अनुसार ही नेपाल के वासी शांति पूर्वक विरोध करें। हमारा देश बुद्ध नीति पर टिका हुआ है। यह संदेश विश्व भर में जाना चाहिए और इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत का यह सकारात्मक संदेश मेरे द्वारा पूरी दुनिया तक पहुँचना चाहिए।”