इंद्रा डूडी प्रकरण में भाजपा की किरकिरी

AYUSH ANTIMA
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झुन्झुनू जिले की चिड़ावा पंचायत समिति प्रधान प्रकरण बहुत ही सुर्खियों में रहा था। विदित हो प्रधान इंद्रा डूडी पर पद का दुरूपयोग व भ्रष्टाचार के आरोपो को लेकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद झुंझुनूं ने पद का दुरूपयोग व भ्रष्टाचार का दोषी माना था। जिला परिषद की जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय आदेश दिनांक 12-10-24 को प्रधान इंद्रा डुडी को निलंबित कर दिया गया। प्रधान इंद्रा डूडी ने जिला परिषद की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच राज्य स्तर से कमेटी का गठन कर निष्पक्ष जांच करवाने का आवेदन किया था। इसको लेकर इस प्रकरण में राज्य स्तरीय जांच कमेटी ने प्रधान इंद्रा डूडी को सभी आरोपों से मुक्त करते हुए उन्हें पुनः प्रधान के पद पर बहाली के आदेश पारित किये है। उपरोक्त प्रकरण का पोस्टमार्टम करें व प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो जिला परिषद व राज्य सरकार की कमेटी दोनों ही जगह भाजपा काबिज है। इसको लेकर जिला परिषद द्वारा की गई जांच संदेह के घेरे में है और उस पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। वह जांच के कौन से कारक थे, जिनको लेकर जिला परिषद ने इंद्रा डूडी को दोषी माना व राज्य सरकार की कमेटी के क्लीन चिट देने से प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। राजनीतिक दृष्टि से देखे तो झुन्झुनू भाजपा की गुटबाजी भी इस प्रकरण को लेकर सामने आई है। विदित हो प्रधान इंद्रा डूडी ने भाजपा नेता बबलू चौधरी के घर पर भाजपा का दुपट्टा धारण कर लिया था लेकिन जिला परिषद ने उस दुपट्टे को नजरअंदाज कर शायद भाजपा के दूसरे खेमे के दबाव में इंद्रा डूडी को दोषी पाया। नवनियुक्त चिड़ावा पंचायत समिति प्रधान रोहतास धांगड़ की ताजपोशी मे झुंझुनूं के विधायक राजेन्द्र भांभू की उपस्थिति भी उसी गुटबाजी का नतीजा थी क्योंकि विधायक राजेन्द्र भांभू व भाजपा नेता बबलू चौधरी की राजनीतिक अदावत से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा। भाजपा जिला संगठन पहले से ही गुटबाजी की मार झेल रहा है क्योंकि नवनियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष के मनोनयन को लेकर प्रदेश प्रवक्ता ने गंभीर आरोप लगाए थे। उनके अनुसार झुंझुनूं को पैराशूट जिलाध्यक्ष मिला क्योंकि उनका नाम पैनल में नहीं था। रही सही कसर प्रधान प्रकरण ने पूरी कर दी। प्रधान पद पर इंद्रा डूडी की बहाली को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसको बबलू चौधरी खेमे की जीत व विधायक राजेन्द्र भांभू की राजनीतिक हार के रूप में देख रहे हैं। इस प्रकरण की छाया आगामी नगर निकाय व पंचायती चुनावों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगी क्योंकि इस गुटबाजी के चलते झुंझुनूं जिले में भाजपा को ज्यादा आशा नहीं करनी चाहिए। डबल इंजन सरकार पर इस निर्णय को लेकर देखें तो इंद्रा डूडी की बहाली सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है। राज्य सरकार की एक जांच एजेंसी दोषी मानकर बर्खास्त करे व राज्य सरकार की ही दूसरी जांच एजेंसी उन्हें क्लीन चिट दे यह निर्णय संदेह के घेरे में है। इस प्रकरण को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को भी हमलावर होने का मौका दे दिया कि भाजपा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को बर्खास्त कर नगर निकाय व पंचायतो पर कब्जा कर संवैधानिक प्रकिया को धता दिखा रही है। निश्चित रूप से इस प्रकरण मे भाजपा की किरकिरी हुई है।

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