झुंझुनूं जिले में विकास का यह आलम है कि विधायक, भावी विधायक, भाजपा प्रत्याशी, जिसको भाजपा सरकार ने संवैधानिकता पद का दर्जा दे रखा है, सभी की निगाहें जयपुर में सचिवालय पर टिकी रहती है। जैसे ही बजट प्रावधान को लेकर किसी कार्य की वित्तीय स्वीकृति निकलती है, लपककर विकास पुरूष के रूप में खुद को स्थापित करने में लगे रहते हैं। इसी तरह डीएफएमटी के पदेन अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं व खनन की रायल्टी का पैसा केवल जनहित में खर्च करने का प्रावधान है, उसको लेकर भी खुद श्रेय लेते नजर आते हैं। यदि झुन्झुनू विधायक महोदय की बात करें तो झुन्झुनू में बनने वाले ओवर ब्रिज को लेकर विधानसभा के प्रश्न काल में इसको लेकर प्रश्न किया तो इसको लेकर सरकार का जबाब था कि झुन्झुनू में रेलवे फाटक का निर्माण कार्य बंद पड़ा है और सरकार इसके निर्माण को पुनः प्रारंभ करने का विचार रखती है। इसको लेकर निविदाएं आमंत्रित कर ली गई है। रेलवे विभाग से 50 प्रतिशत हिस्सा राशि की सहमति के पश्चात कार्य करना प्रस्तावित है। अब सवाल उठता है कि जब डबल इंजन सरकार होने के बावजूद रेलवे पैसे की स्वीकृति जारी नहीं कर रहा तो अशोक गहलोत सरकार को इसके निर्माण को लेकर आरोप लगाना कहां तक उचित था। विदित हो मुख्यमंत्री व सरकार के मंत्रियों के ताबड़तोड दौरे हो रहे हैं और एक दौरे में जहां आमसभा होती है, करोड़ों रूपये की होली फूंक दी जाती है लेकिन यह ओवर ब्रिज जो मुंह बाए खड़ा है, उसको बनाने के लिए रेलवे का मुंह ताका जा रहा है। सरकार को बने करीब एक साल से ज्यादा का समय हो गया और अभी तक रेलवे से राशि स्वीकृत नहीं हो पाई है, जबकि डबल इंजन सरकार विकास के विज्ञापनों में ढोल पीट रही है। ऐसा नहीं कि यह ओवर ब्रिज का ही मामला है, बरसात के दिनों में झुंझुनूं के मुख्य मार्ग झील में तब्दील हो जाते हैं व झुन्झुनू में अग्रसेन सर्किल से बगड़ वाली सड़क गंदे पानी की नदी बन जाती है। कहा गया है कि जब उगता ही नहीं तपा तो छिपता हुआ क्या तपेगा। यही बात झुंझुनूं विधायक के लिए कहीं जा सकती है कि इन प्रश्नों के पुछने में ही अपना कार्यकाल पूरा कर लेंगे। झुंझुनूं में मंत्रियों के ताबड़तोड दौरे जब से डबल इंजन सरकार बनी है, देखने को मिले हैं लेकिन झुन्झुनू जिले के विधायक व संगठन के पदाधिकारी अलग अलग ढाणियों में उनका स्वागत सत्कार को ही विकास मान बैठे हैं। सरकार में विधायक की कार्यशैली को विधानसभा में प्रश्न काल में प्रश्न पूछकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करते देखा गया। संगठन की बात करें तो नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के इर्द-गिर्द वहीं जाने पहचाने चेहरे नजर आते हैं, जो संगठन में गुटबाजी हावी होने के स्पष्ट संकेत है। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि विकास की गंगा अब शेखावाटी की लाइफ लाइन काटली नदी का स्थान लेगी या कागजों तक ही विकास सिमट कर रह जायेगा।
3/related/default