जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर में क्रिया शारीरिक शिक्षकों के लिए छह दिवसीय कंटीन्यूअस मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को किया गया। इस कार्यक्रम में पूरे देश के लगभग 16 राज्यों से 30 प्रतिभागी शामिल हुए, जो अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं। यह कार्यक्रम शिक्षण, प्रशिक्षण, क्लीनिकल और रिसर्च के गुणों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उद्घाटन सत्र का आयोजन संस्थान के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा की अध्यक्षता में हुआ। प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय टेक्नोलॉजी का युग है, और सभी शिक्षकों को अपने अकादमिक एवं क्लीनिकल कार्यों में आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल पारंपरिक ज्ञान पर निर्भर रहना अब संभव नहीं, बल्कि नवाचार और तकनीक के माध्यम से आयुर्वेद को नए आयाम देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर महेंद्र सिंह मीणा ने कहा कि यह कार्यक्रम ज्ञान और अनुभव साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे अपने अनुभव एवं विचारों को साझा करें ताकि सभी को अधिक से अधिक सीखने का अवसर मिल सके। क्रिया शरीर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सी.आर.यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम केवल शैक्षणिक पक्ष का ही अध्ययन नहीं करेगा, बल्कि बीमारियों का विभाजन एवं उनका विश्लेषण भी करेगा। इससे रोगों से भी परिचित हो सकेंगे और उनका समाधान खोजने में समर्थ होंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक अनुभव और ज्ञान साझा करने से ही आयुर्वेद का वैज्ञानिक विकास संभव है।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर बालकृष्ण पवार ने कफ दोष एवं ओज पर अपने अनुभव साझा किए। वहीं, प्रोफेसर स्वाति
चौबे ने बाल एवं पित्त पर अपने शोध और क्लीनिकल अनुभव प्रस्तुत किए, जिनसे सभी प्रतिभागियों को लाभ हुआ।
उद्घाटन सत्र में संस्थान के प्रोफेसर हेमंत कुमार, प्रोफेसर एच.एम.एल मीणा, प्रोफेसर अनुपम श्रीवास्तव, प्रोफेसर भारती , प्रोफेसर सुनील यादव, प्रोफेसर सुरेंद्र शर्मा, प्रोफेसर संदीप, प्रोफेसर गोपेश मंगल, प्रोफेसर सुमन शर्मा सहित विभागीय संकाय सदस्य भी उपस्थित थे। सभी ने इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं और प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। यह 6 दिवसीय सीएमई कार्यक्रम न केवल क्रिया शारीर शिक्षकों के लिए अकादमिक सुधार का अवसर है, बल्कि यह क्लीनिकल एवं रिसर्च के क्षेत्र में नवीन तकनीकों को अपनाने और आधुनिक ज्ञान से लैस होने का भी माध्यम है। इस प्रकार के कार्यक्रम देशभर में आयुर्वेदिक शिक्षा को सुदृढ़ करने में मददगार साबित हो रहे हैं।