गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अलपकाल बिद्या सब आई: श्रीराम मंदिर प्रन्यास, जयपुर

AYUSH ANTIMA
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जयपुर: श्रीराम मंदिर, आदर्श नगर में चल रही श्रीराम लीला में सुरभि कला केंद्र, कोटा के कलाकारों ने पृथ्वी की पुकार, श्रीराम जन्म, शिव दर्शन लीला, नामकरण संस्कार, विद्याध्ययन की लीलाएं मंचित की। श्रद्धालु दर्शक लीला का दर्शन कर आनंदित हो उठे। लीला के अंतर्गत रावण के अत्याचारों से पृथ्वी भयभीत और व्याकुल हो गई। रावण कहीं पर भी शुभ आचरण होने नहीं देता था। जप, योग, वैराग्य तथा यज्ञ में भाग पाने की बात रावण कहीं से सुनता तो स्वयं उठ दौड़ता और ऋषि मुनियों को परेशान करता था। संसार में भ्रष्ट आचरण फैल गया था। रावण सभी को बहुत कष्ट देता था। रावण के अत्याचारों से व्यथित होकर देवता, मुनि और गंधर्व, ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। पृथ्वी गौ माता का शरीर धारण किए हुए संग थी।ब्रह्मा जी ने सभी से कहा कि आप श्री हरि के चरणों का ध्यान करो, वही विपत्ति का नाश करेंगे। देवताओं और पृथ्वी की स्तुति से आकाशवाणी हुई कि मैं शीघ्र ही सूर्यवंश में मनुष्य रूप में अवतार लूंगा। देवताओं ने पृथ्वी पर वानर देह धारण की और भगवान की राह देखने लगे। राजा दशरथ जी ने वशिष्ठ जी को संतान नहीं होने का दुख सुनाया, वशिष्ठ जी ने श्रृंगी ऋषि को बुलाया और उन्होंने पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया। नौमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। पवित्र चैत्र के महीने में नवमी तिथि शुक्ल पक्ष और भगवान को प्रिय अभिजीत मुहूर्त में कृपालु भगवान प्रकट हुए, कुछ समय पश्चात बालकों का नामकरण गुरु वशिष्ठ ने किया। श्रीरामचंद्र जी की सुंदर बाल लीलाओं का सरस्वती जी, शेषजी, शिवजी और वेदों ने गुणगान किया है। चारों भाई जब कुमार अवस्था के हुए तो उनका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। गुरु गृह गए पढ़न रघुराई। अलपकाल बिद्या सब आई। श्री रघुनाथ जी भाइयों सहित गुरु के घर विद्या पढ़ने गए और थोड़े ही समय में उनको सब विद्याएं आ गई।
रामलीला से जुड़े संजय आहुजा और जितेंद्र चड्ढा ने बताया कि गुरुवार को विश्वामित्र आगमन, ताड़का सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, गंगावतरण और जनक अमराई की लीला का मंचन होगा।

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