मेरी उछल-कूद में कमी हो तो बताओ

AYUSH ANTIMA
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जंगल में चुनाव हुए सत्ता शेर के पास थी। इन चुनावों में शेर ही सत्ता के प्रबल दावेदार थे। जब राजा के चयन को लेकर बैठक चल रही थी तो आकाशवाणी हुई कि यदि जंगल व जंगल में रहने वालों का भला और खुशहाली के साथ विकास चाहते हो तो बंदर को सत्ता सौंप दो। आकाशवाणी सुनकर सभी जानवर सकते में आ गये और मजबूरन बंदर को राजा घोषित करना पड़ा। आकाशवाणी के चलते सत्ता बंदर को सौंप दी गई। सभी ने अनमने मन से व शेर को भी बंदर की अधीनता स्वीकार करनी पड़ी। सभी जानवऱो ने माला, साफा, दुपट्टा पहनाकर बंदर का अभिनंदन किया। समय बीता जंगल में आग लग गई। सारे जानवरो ने इकट्ठा होकर राजा बंदर के पास इससे निजात की गुहार लगाई। उनकी बात सुनकर बंदर ने उछल-कूद शुरु कर दी। कभी पेड़‌ की इस डाल पर कभी उस डाल पर दो घंटे तक उछल-कूद करने के बाद बंदर शांत होकर बैठ गया। जानवरों ने कहा महाराज जंगल में आग लगी है, कुछ करो तो बंदर ने बोला आग को छोड़ो मेरी उछल कूद में कोई कमी हो तो बताओ। 
उपरोक्त प्रकरण को यदि राजस्थान को लेकर देखें तो मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर के दौरों में व्यस्त हैं तो मंत्री उनकी अगवानी करने पहुंच जाते हैं। माला, गुलदस्ता, दुपट्टों की बहार देखने को मिलती है। इन आयोजनों में करोड़ों रूपये फूंके जाते हैं और वहीं मोदी उवाच इन आमसभाओं में सुनने को मिलता है। अभी हाल ही में आठ साल तक जीएसटी की मार झेल रहे लोगों को अब मंत्री व विधायक गली गली जीएसटी के फायदे बता रहे हैं। ताज्जुब तो तब होता है, जब उनके मुखारविंद से यह सुनने को मिलता है कि हर घर में चालीस से पचास हजार तक की बचत होगी। अब यह गणित तो वहीं महामानव बता सकते हैं कि एक मजदूर, जो दिहाडी करके पन्द्रह बीस हजार महीना कमाता है, उसको इतनी बचत कहां से होगी। संगठन व सरकार में तालमेल की कमी नजर आ रही है। भले ही केन्द्रीय नेतृत्व व प्रदेश नेतृत्व इस बात का दावा करें कि संगठन में कोई गुटबाजी नहीं है। आलम यह है कि इसी गुटबाजी के चलते संगठन के पदाधिकारियों का चयन नहीं हो पाया है। सरकार की यदि बात करें तो सत्तापक्ष के विधायकों का दर्द विधानसभा में देखा जा सकता है। यदि शेखावाटी अंचल के जिला झुंझुनूं की बात करें तो प्रभारी मंत्री का करीब हर महीने दौरा देखने को मिलता है। उनके आगमन पर वही साफा, दुपट्टा व माला संस्कृति हावी रहती है। विकास व जनहितकारी मुद्दे नदारद रहते हैं। माननीय मंत्री अपने दौरे की फोटो सोशल मीडिया पर डालकर विकास की इति श्री कर लेते हैं। जिले में संगठन की बात करें तो कमोबेश वही स्थिति है, जो प्रदेश स्तर पर है। इसी गुटबाजी के चलते नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अपनी टीम की घोषणा नहीं कर पाई है। इतना जरूर है कि अभिनन्दन समारोहों में जरूर व्यस्त नजर आती है। उपरोक्त तथ्यों को देखकर यही कहा जा सकता है कि मेरी उछल कूद में कहीं कमी रही तो बताओ ।

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