राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव कृष्णकांत पाठक की केंद्र सरकार में नियुक्ति को लेकर इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में जबरदस्त हलचल मची हुई है। भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने हाल ही में पाठक को संयुक्त सचिव, उर्वरक विभाग पद पर प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। आदेश जारी होते ही यह माना जाने लगा कि वे शीघ्र ही दिल्ली का रुख करेंगे लेकिन राज्य सरकार की मंशा क्या है, फिलहाल स्पष्ट नही है।
सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार ने उनकी प्रतिनियुक्ति के लिए दी गई एनओसी वापस ले ली है। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य उन्हें दिल्ली भेजना नहीं चाहता। मुख्यमंत्री कार्यालय में पाठक को एक भरोसेमंद और काबिल अधिकारी माना जाता है। देवस्थान और कार्मिक जैसे संवेदनशील विभागों में उनकी साख और कार्यशैली की वजह से सरकार उन्हें अपने पास बनाए रखना चाहती है। बतौर वित्त सचिव इनका कार्यकाल बहुत ही उल्लेखनीय रहा। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने उन्हें आधिकारिक सूची में शामिल कर नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। ऐसे में यह टकराव की स्थिति बन गई है। नियमों के अनुसार, किसी भी आईएएस अधिकारी को केंद्र में भेजने से पहले राज्य सरकार की एनओसी आवश्यक होती है। एनओसी वापस लिए जाने के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या केंद्र अपने आदेश पर अडिग रहेगा या राज्य की आपत्ति को मानते हुए पाठक को जयपुर में ही रहने देगा। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की प्रतिनियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राज्य और केंद्र के बीच खींचतान और प्रशासनिक संतुलन की जटिलता झलकती है। यदि केंद्र और राज्य अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं तो कानूनी और प्रशासनिक विवाद भी गहरा सकता है।
फिलहाल पूरे प्रकरण पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। क्या कृष्णकांत पाठक को दिल्ली जाना होगा या वे राजस्थान सरकार के भरोसेमंद सिपहसालार बने रहेंगे, इस पर जल्द ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। उम्मीद है कि अंततः राज्य सरकार को इन्हें नए पद के लिए कार्यमुक्त करना ही पड़ेगा ।