पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में जबरदस्त गुस्सा था, इसको लेकर भारतीय सेना ने आपरेशन सिंदूर के तहत पाक की रीढ़ तोड़ दी थी। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खून व पानी एक साथ नहीं बस सकते बहुत चर्चित रहा। उनका इशारा उस अंतरराष्ट्रीय जल समझौते को लेकर था, जिसके तहत पाक को सिंधु नदी से जल दिया जाता था लेकिन अब भारत और पाक के बीच बहुराष्ट्रीय स्तर पर मैच हो सकता है। इसको लेकर पूर्व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का बयान चौंकाने वाला है। उन्होंने इसको लेकर कहा है कि इस तरह के मैचों में भारत की भागीदारी टूर्नामेंट के नियमों से प्रेरित है न कि कूटनितिक व राष्ट्रीय नितियो में बदलाव है। जब एसीसी व आईसीसी द्वारा बहुराष्ट्रीय मैच आयोजित किए जाते हैं तो देशों का भाग लेना एक अनिवार्यता और आवश्यकता बन जाती है। अगर ऐसा नहीं होगा तो टूर्नामेंट से बाहर हो जायेंगे और मैच छोड़ना होगा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने ठाकुर से एक कदम आगे बढ़कर बयान दिया कि भारत का मकसद पाक को हराना है। यह मैच अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओ के तहत खेलना होगा यानी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलना भारत की मजबूरी है। अब सवाल यह उठता है कि जब क्रिकेट जैसे खेल में अंतरराष्ट्रीय दबाव है तो सिंधु जल समझौता भी अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हुआ है, उसको भारत सरकार ने एक झटके में कैसे खत्म कर दिया, जैसा कि दावा किया जा रहा है। इलैक्ट्रोनिक मिडिया जिसको देश के आवाम के लिए मोमबत्ती बनना चाहिए था, वह सरकार के लिए अगरबत्ती बन रही है, अब इस मुद्दे के अनगिनत फायदे बताना शुरू कर देंगे। इतना ही नहीं गला फाड़ फाड़ कर इसको विश्व गुरू बनने की तरफ एक कदम बतायेगे। इसके साथ ही देश की अर्थव्यवस्था से जोड़कर भी इसके फायदे बतायेंगे कि भारत पाक क्रिकेट मैच के कारण ही देश विश्व की महाशक्ति बनेगा।
3/related/default