श्रीकोलायत में फर्जी भूमि आवंटन के मामले में विभागों पर गंभीर सवाल

AYUSH ANTIMA
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श्रीकोलायत क्षेत्र में उपनिवेशन विभाग की ओर से भूमि के गलत आवंटन की स्वीकारोक्ति सरकार के विभागीय कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल है। विधायक अंशुमान सिंह भाटी की ओर से ये प्रकरण बार बार विधानसभा में उठाने से विभाग को गलत आवंटन की बात स्वीकार करनी पड़ी। अगर यह मामला विधानसभा में नहीं उठाया जाता तो इन गलत आवंटन के मामलों में कोई कार्रवाई हो जाती कहना मुश्किल है। विभागों में तो अधिकारी सुनते ही नहीं है। शिकायतें या तो जांच की लंबी प्रक्रिया में होती है अथवा रद्दी की टोकरी में। मामला विधानसभा में होने से श्रीकोलायत में खनन भूमि और आगोर भूमि का गलत आवंटन भी रिकॉर्ड में आ गया। अब इन मामलों में आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई होनी है। सवाल यह है कि विभाग के अधिकारियों ने नेताओं के संरक्षण में नियम विरुद्ध भूमि का फर्जी आवंटन कर कैसे दिया ? यह सरकार और विभाग के अफसरों के समक्ष गंभीर सवाल है। कोई भी राजनीति दल हो, सत्ता के साथ माफिया जुड़कर नेताओं के संरक्षण में नियम विरुद्ध ऐसे काम करवा ही लेते हैं। जब सरकारें बदलती है तो ऐसे मामले बड़े राजनीतिक मुद्दे बन जाते है। श्रीकोलायत में भी यही हुआ है। अब जब गलत आवंटन होना सरकार के रिकॉर्ड में आ गया है तो मुद्दा दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई का है। अब देखना यह है कि इस घेरे में कितने अफसर, नेता और भू माफिया पकड़ में आते है।
मामला राजनीतिक और गंभीर है, इसकी जद में कई छुटभैया नेता और सफेदपोश भी आ सकते हैं। वैसे कांग्रेस के राज में बीकानेर जिले में कथित तौर पर नेताओं के संरक्षण में भू माफिया और अफसरों की मिलीभगत से कमोबेश दस हजार बीघा जमीन का फर्जी आवंटन और खरीद फरोख्त के मामले सामने आए। इसमें खाजूवाला, छतरगढ़, पूगल में कई अधिकारियों और अन्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, आवंटन भी निरस्त किए गए। श्रीकोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने श्रीकोलायत, बज्जू, बीकमपुर में खनन, आगोर की भूमि और उपनिवेश की भूमि के गलत आवंटन के मामले विधानसभा में उठाए। इन मामलों में राज्य सरकार ने नोटिस लिया है। उपनिवेशन विभाग ने 2200 बीघा भूमि का गलत आवंटन स्वीकार किया है। इसकी जांच और निरस्त करने की कार्रवाई प्रक्रिया में है। फर्जी आवंटन नहीं हो, इसके लिए सरकार ने पुख्ता और कड़े नियम बना रखे है, फिर भी फर्जी आवंटन हुए हैं। अब तो दोषियों के खिलाफ हर स्तर पर कड़ी कार्रवाई ही आगे के लिए कड़ा संदेश हो सकता है।

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