यह कैसा गौशाला का संचालन (भाग दो)

AYUSH ANTIMA
By -
0


आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने बेसहारा गौवंश की दुर्दशा व गौशालाओं के संचालन करने वालों की गौवंश के प्रति संवेदनशीलता को लेकर अपने लेखों में आमजन, सरकार व उन भामाशाहों के संज्ञान में लाने को लेकर अपने लेखों मे उजागर किया है। गौशालाओं की आड़ में जो गौवंश की सेवा हो रही है, उसमे सिरोही जिले की आबू रोड़ स्थित गौपालन गौशाला जो अग्रवाल समाज द्वारा संचालित है, उसका एक विडियो वायरल हो रहा है, जिसमे गौवंश की दुर्दशा की मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर देखने को मिली है। इस गौशाला के पास 600 बीघा जमीन होने के साथ ही 1200 के करीब गौवंश है। इतनी जमीन होने के बावजूद गौवंश नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। चित्रों मे गौवंश कीचड़ में बैठने को मजबूर है। यह भी देखा गया है कि गौवंश मृत अवस्था में भी है। निश्चित रूप से देश के गौ भक्त इस गौशाला को उदारमना से आर्थिक सहयोग देने के साथ ही सरकार से भी अनुदान मिलता होगा। गौवंश की इस दुर्दशा को लेकर गौशाला संचालक नेमी अग्रवाल से दूरभाष पर बात हुई, सरकारी विभाग के निरीक्षण का हवाला दिया, जिसकी रिपोर्ट उन्होंने वाट्सएप पर भेजी। उस रिपोर्ट मे करीब पिछले एक माह से 30 अगस्त तक केवल एक गौवंश की मृत्यु होना बताया गया। कीचड़ में सने गौवंश को लेकर निर्देशित किया गया कि तुरंत प्रभाव से भूमि समतलीकरण व उचित ढलान आदि द्वारा जल निकासी की व्यवस्था की जाए।
यदि एक और विडियो की बात करे जो वायरल हो रहा है, हालांकि आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) इस विडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता लेकिन इस विडियो में तीन गौवंश मृत दिखाई है व जिस तरह से पीने के पानी की तस्वीर है, उससे स्पष्ट दिखाई देता है कि यह पानी पीने योग्य की बात तो दूर गटर में डालने योग्य भी नहीं है। इसके साथ ही चारे की उत्तम व्यवस्था को लेकर भी यह दिखाई दे रहा है कि खुले आसमान के नीचे चारा डाल रखा है। इस विडियो को लेकर संचालक नेमी अग्रवाल ने बताया कि यह बहुत पुराना है व जो बेसहारा गौवंश स्थानीय निकाय गौशाला में छोड़कर जाती है, वह बहुत ही कमजोर होती है व गौशाला में चारा भी नहीं खाती। यदि संचालक के कथन, वायरल विडियो व सरकारी रिपोर्ट का अवलोकन करें तो उसमें विरोधाभास नजर आता है कि कहीं न कहीं गौवंश के प्रति संवेदनशीलता का अभाव है, जिसको लेकर बार बार हम लिखते रहे हैं। हमें गौशाला से कोई दुर्भावना नहीं लेकिन एक सनातनी होने के नाते बेसहारा गौवंश को आसियाना दिलाने में लेखनी अनवरत चलती रहेगी। गौशाला की दुर्दशा का चित्रण करने का एक मंतव्य यह भी है कि उन गौभक्त भामाशाहों तक भी आवाज पहुंचे, जो करोड़ों रूपये की आर्थिक सहयोग राशि गौवंश की सेवा में समर्पित करते हैं।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!