झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): देशभर में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र ओला ने भी चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया है। सांसद ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस को पूरी तरह असफल करार दिया। उन्होंने कहा कि आयोग वोट चोरी पर सफाई देने आया था, लेकिन पूरे समय भाजपा की भाषा बोलता रहा और किसी भी सवाल का ठोस जवाब नहीं दे पाया। सांसद ने अपनी पोस्ट में कई अहम सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में कुल वोट, व्यस्क आबादी से ज्यादा कैसे हो गए, इस पर चुनाव आयोग के पास कोई जवाब नहीं था। एक ही घर में दर्जनों वोटर कैसे रजिस्टर्ड हो गए, इस पर भी कोई जवाब नहीं मिला। सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार में इतनी हड़बड़ी में SIR क्यों करवाई जा रही है और बाढ़ग्रस्त हालात में इसे जरूरी क्यों समझा जा रहा है, इसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
सांसद ने बूथ की वीडियोग्राफी रोकने पर भी आयोग की दलील को कुतर्क बताया। उन्होंने लिखा कि आयोग का कहना था कि वोट डालती महिलाओं का CCTV फुटेज महिला प्राइवेसी का हनन है, लेकिन जब बूथ के बाहर लाइन लगती है तो वहां कौन सी प्राइवेसी होती है और जब वोट डालते समय महिलाओं से हिजाब उतरवाकर पुरुष पुलिसकर्मी चेहरा देखते हैं, तब प्राइवेसी कहां जाती है। उन्होंने 'जीरो नंबर मकान' का उदाहरण भी उठाया। सांसद ने कहा कि आयोग का कहना था कि जो लोग दिन भर काम करके सड़क पर सोने आते हैं, वही जीरो नंबर मकान कहलाता है। सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग रात में सड़कों पर जाकर सोए हुए लोगों को जगाकर वोटर आईडी बना रहा है। एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोट रजिस्टर्ड होने पर भी सांसद ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आयोग का जवाब था कि हजारों लोग एक जैसे नाम के हो सकते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उनके पिता और पति का भी एक ही नाम होगा और उनका पता भी एक ही कैसे हो सकता है। डिजिटल मशीन रीडिंग फॉर्मेट वाली वोटर लिस्ट न देने पर सांसद ने चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने लिखा कि आयोग का कहना है कि इससे निजता का हनन होता है, जबकि सच यह है कि ऐसी वोटर लिस्ट से वोट चोरी और भी तेजी से पकड़ी जा सकती है। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी ने वोट चोरी के सबूत दिए हैं तो फिर वोटर लिस्ट में सुधार क्यों नहीं किया जा रहा। आयोग की ओर से हलफनामा देने या माफी मांगने जैसी बातें कही जा रही हैं, जबकि राहुल गांधी द्वारा बताई गई त्रुटियों पर काम करने की जरूरत है। सांसद ने पूछा कि अनुराग ठाकुर से हलफनामा क्यों नहीं मांगा जाता। सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि 'एक व्यक्ति-एक वोट' का सिद्धांत निभाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी आयोग की है और साफ-सुथरी वोटर लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी भी आयोग की है।
सांसद ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश को बाहर क्यों किया गया, अब यह साफ हो गया है। अगर न्यायाधीश शामिल होते तो शायद ऐसी कठपुतली आयोग को नहीं मिल पाती। पोस्ट के अंत में सांसद ने लिखा कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए वोट चोरी के सबूतों का चुनाव आयोग कोई जवाब नहीं दे पाया और सिर्फ बहानों के पीछे छिपता रहा लेकिन लोकतंत्र से खिलवाड़ के लिए देश का कानून आयोग को माफ नहीं करेगा और वक्त आने पर उसे हिसाब देना होगा।