झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): व्यासपीठ से महाराज श्री ने कथा में कहा कि रामकथा में विभीषण ने रावण को माता सीता को लौटाने के लिए समझाया था। विभीषण, रावण का छोटा भाई था और उसने रावण को सीता हरण के दुष्परिणामों से अवगत कराने की कोशिश की थी। उसने रावण को यह भी बताया कि राम, भगवान विष्णु के अवतार हैं और उनसे युद्ध करने का परिणाम विनाश ही होगा। विभीषण ने रावण को सीता को लौटाने और राम से क्षमा याचना करने की सलाह दी। हालांकि, रावण ने विभीषण की बातों को अनसुना कर दिया और उसे अपमानित करके लंका से निकाल दिया। इसके बाद, विभीषण राम की शरण में चले गए और राम ने उन्हें अपनी शरण में ले लिया। इस प्रकार, रामकथा में विभीषण का चरित्र एक धर्मपरायण और बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में उभरता है, जो अपने भाई को सही मार्ग दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन जब रावण नहीं मानता, तो वह धर्म के मार्ग पर चलने का निर्णय लेता है। कथा में संत विजय कौशल जी महाराज ने सागर पर राम सेतु बनाने की कथा का भी विस्तार से वृत्तांत सुनाया कि किस प्रकार पत्थर पर हनुमानजी महाराज ने राम नाम लिखें और वे पत्थर तैर गये। इसके अतिरिक्त अन्य और प्रसंगों की भी विस्तार से व्याख्या की जिनमें लक्ष्मण जी मूर्छित होने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आते हैं इत्यादि प्रसंग सुनाये।
8 अगस्त को कथा सुबह 9 बजे से होगी जिसमें रावण वध के पश्चात राम राज्याभिषेक के साथ कथा को विश्राम दिया जाएगा।
कथा के मध्य महाराज जी के सुन्दर भजनों पर श्रोता भक्त भाव विभोर हो गये। कथा से पूर्व राणी सती रोड स्थित श्री श्याम मंदिर परिसर में विद्वान पंडितों के आचार्यत्व में हवन में आहुतियां दी गई एवं बाबा श्याम का अभिषेक किया गया। प्रतिदिन सायंकाल दैनिक प्रवचन कार्यक्रम में श्री विजय कौशल जी महाराज ने विभिन्न धार्मिक विषयों पर प्रवचन किये। विदित है कि कथा श्रवण हेतु कथा स्थल पर आने के लिए भक्तों की सुविधा हेतु शहर के विभिन्न स्थानों से आने जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी आयोजकों की ओर से निःशुल्क उपलब्ध रहती है। कथा समापन पर सभी श्रोता भक्तों के लिए साउथ इंडियन इटली एवं इटली बड़ा कि सुन्दर व्यवस्था तत्पश्चात् सभी को प्रसाद वितरण किया जाता है।