विधि मंत्री जोगाराम पटेल का बयान भ्रामक: कोर्ट का स्पष्ट निर्देश "परीक्षा होगी निरस्त

AYUSH ANTIMA
By -
0


राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने मीडिया के सामने बयान दिया कि “कोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को रद्द करने का कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया है, सिर्फ जांच और ऑब्जर्वेशन के आदेश दिए हैं।” मंत्री की इस टिप्पणी ने राज्य में उग्र बहस छेड़ दी है, क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले की भाषा और उसकी नज़ीर ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा धमाका कर दिया है। राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने 28 अगस्त 2025 को बहुचर्चित पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द कर दिया। फैसले के पैरा 134 में कोर्ट ने “Direction” शब्द का उपयोग करते हुए स्पष्ट और बाध्यकारी निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया रद्द की जाए, दोषियों की पहचान कर कार्रवाई हो और भविष्य में इसी प्रक्रिया से सभी योग्य अभ्यर्थी समाहित किए जाएं। कोर्ट ने कहा, “भर्ती में व्यापक स्तर पर पेपर लीक, धांधली और राजस्थान लोक सेवा आयोग के अधिकारियों की संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिले हैं। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता खत्म हो चुकी है। वर्तमान भर्ती को जारी रखना न तो कानून के अनुरूप है, न समाज के हित में।” कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशिक्षु अभ्यर्थियों, उनके परिजनों और पूरे प्रशासन में भूचाल आ गया। हजारों युवाओं की मेहनत अधर में लटक गई; चयनित अभ्यर्थी सड़क पर आंदोलन कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर “ईमानदारों को न्याय दो, दोषियों को सजा दो” के नारे गूंज रहे हैं। राजनीतिक गलियारे में भी उबाल है: विपक्ष ने सरकार पर कोर्ट आदेश को छुपाने और युवाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। मंत्री जोगाराम पटेल ने बार-बार कहा कि “कोर्ट ने भर्ती के निरस्त होने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया।” वहीं कोर्ट के फैसले, खासतौर पर पैरा 134 में “Direction” शब्द और आदेशात्मक भाषा, मंत्री के बयान से बिल्कुल भिन्न हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि यह आदेश बाध्यकारी है। न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू करने का मार्गदर्शन भी दिया है। राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के फैसले ने न्याय, राजनीति और युवाओं के भविष्य को सवालों के घेरे में डाल दिया है। एक ओर अदालत ने साफ शब्दों में भ्रष्टाचार के आगे जीरो टॉलरेंस दिखाया, दूसरी तरफ मंत्री का बयान असमंजस और भ्रम बढ़ा रहा है। पैरा 134 के निर्देशों के अनुसार, अब नई परीक्षा और कड़ी कार्रवाई के बिना समाधान संभव नहीं। सरकार की अगली रणनीति और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!