भारत के हितों की सुरक्षा करना नरेन्द्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता

AYUSH ANTIMA
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भारत नाम न केवल ऐतिहासिक है बल्कि यह नाम देश की संस्कृति, परम्पराओं और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक भी है। भारत की शूरवीरता के इतिहास की पहचान इसी बात से की जा सकती है कि राजा भरत, जिसके नाम पर देश का नाम भारत पड़ा, उसे बचपन में ही शेर के मुंह में हाथ डालकर दांत गिनने का शोक था। उसी गौरवशाली इतिहास को लिए भारत की संप्रभुता, अस्मिता व स्वाभिमान को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ललकार रहे हैं। अमरीका भारत के अभूतपूर्व विकास को लेकर विचलित है और दबाव की राजनीति कर विकास के पहिए के ब्रेक लगाने की नाकाम कोशिश कर रहा है लेकिन भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त हाथों में है, उसी का परिणाम है कि भारत ने ट्रम्प की बातों को गंभीरता से नहीं लिया है। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए ट्रम्प भारत पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं, उसके पीछे यह कुतर्क है कि भारत रूस से कच्चा तेल क्यों खरीद रहा है जबकि रूस यूक्रेन पर हमले कर रहा है। इसको लेकर भारत को सबक सिखाने के लिए ट्रम्प ने भारत के उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाया है और धमकी दी है कि यदि रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया तो यह टैक्स 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रम्प इस मुगालते में थे कि भारत तेल खरीदना बंद कर देगा। इसके विपरीत भारत ने रूस से तेल खरीदना तो जारी रखा ही है बल्कि सूत्रों की मानें तो बहुत से हथियारों की खरीद के सौदे भी रद्द कर दिए हैं। इसको लेकर ट्रम्प को समझना होगा कि वर्तमान में यह वह भारत है, जो घरेलू मामलों में किसी भी विश्व की शक्ति की चौधराहट स्वीकार नहीं करता क्योंकि अब भारत का नेतृत्व मोदी के सशक्त हाथों में है और यही कारण है कि खुद को विश्व का ठेकेदार समझने वाले अमरीका के दबाव में नहीं आया। इसमें कोई संदेह नहीं कि मोदी ने डोनाल्ड ट्रम्प को अपना मित्र कहा था लेकिन उस मित्रता की आड़ में यदि ट्रम्प भारत के स्वाभिमान को ललकारते हैं तो यह नरेन्द्र मोदी को कतई मंजूर नहीं है। डोनाल्ड ट्रम्प भारत से व्यापार करने व हथियार बेचने को लेकर दबाव की राजनीति कर रहे हैं या दूसरे शब्दों में यह कहें कि ट्रम्प ब्लैकमेलर की भूमिका में हैं। इसको लेकर भारत की तरफ से करारा जबाब अमरीका को देना पड़ा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भारत की संप्रुभता, स्वाभिमान, एकता, अखंडता व हितों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रम्प को भारत के गौरवशाली इतिहास को भी नहीं भूलना चाहिए कि इसके पूर्वज शेरों से खेलना अपना शोक समझते थे।

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