मालपुरा में पत्रकारों का अनूठा मौन प्रदर्शन: काली पट्टी और बंद जुबानों से उठाई पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग

AYUSH ANTIMA
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*मालपुर

मालपुरा/टोंक: डिग्गी लक्खी मेले में पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार और प्रशासनिक दबाव के खिलाफ मालपुरा में पत्रकारों ने एक अभूतपूर्व, शांतिपूर्ण लेकिन गूंजता हुआ प्रदर्शन किया। शनिवार को कस्बे के व्यास सर्किल पर पत्रकारों ने मुंह पर काली टेप और बाजू पर काली पट्टी बांधकर मौन मानव शृंखला बनाई और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे लगातार हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन में पत्रकारों ने बिना एक शब्द बोले, अपने चेहरे पर काली टेप लगाकर यह संदेश दिया कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला जाता है, जब सवाल पूछने वालों को डराया-धमकाया जाता है तो पत्रकार की कलम नहीं रुकती पर समाज के लिए चेतावनी ज़रूर बन जाती है।
प्रदर्शन के बाद सभी पत्रकार काली टेप के साथ ही एडीएम कार्यालय पहुंचे, जहाँ अतिरिक्त जिला कलेक्टर विनोद कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि डिग्गी मेले में वरिष्ठ पत्रकारों को न केवल अपमानित किया गया, बल्कि उन्हें अकेले बुलाकर धमकाने, मानसिक दबाव बनाने और सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाने की कोशिश की गई। इसमें नायब तहसीलदार एवं कार्यवाहक ईओ हंसराज चौधरी और ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमित चौधरी की सीधी भूमिका को उजागर किया गया है।
ज्ञापन में लिखा गया है कि पत्रकार राजकुमार पाराशर जब कंट्रोल रूम में रिपोर्टिंग के दौरान कुछ समय बैठने के लिए सोफे पर रुके, तो हंसराज चौधरी द्वारा उन्हें "यह आपकी जगह नहीं है" कहते हुए उठाया गया। वहीं पत्रकार गोपाल नायक जब पार्किंग ठेके में गड़बड़ी की रिपोर्टिंग कर रहे थे, तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमित चौधरी ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए कहा कि "मेरे अधिकारियों को परेशान करोगे तो अच्छा नहीं होगा, अकेले में मिलना, सब समझा दूंगा।"
पत्रकारों ने कहा कि यह घटनाएं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा IPC की धारा 503 (आपराधिक डर), 504 (जान बूझकर अपमान), 506 (धमकी) के अंतर्गत दंडनीय हैं। पत्रकारों ने मांग की कि इन अधिकारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही हो और राजस्थान में शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।
ज्ञापन में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहाँ पत्रकारों के लिए अलग से सुरक्षा अधिनियम हैं, जिनमें हमलावरों पर गैर-जमानती धाराएं लगाई जाती हैं। राजस्थान में भी यही व्यवस्था लागू की जाए, जिससे पत्रकार निडर होकर काम कर सकें और किसी दबाव या धमकी से विचलित न हों। यह प्रदर्शन भले ही शांत था, लेकिन इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। पत्रकारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अब न झुकेंगे, न चुप रहेंगे। यदि सवाल पूछना गुनाह है, तो वे इस गुनाह को हर रोज दोहराएंगे — जब तक कि सच जनता तक न पहुँच जाए। यह सिर्फ मालपुरा की बात नहीं, यह पत्रकारिता के सम्मान की लड़ाई है।
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