जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर में सोमवार को "आयुर्वेद आहार" विषय पर आधारित छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य आहार के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण और रोग प्रबंधन में आयुर्वेद के सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में समझना और प्रचारित करना है। कार्यक्रम का उद्घाटन एनआईए के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने किया। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि आयुर्वेद में "आहार" को जीवन का मूल आधार माना गया है। उन्होंने जीवनशैली संबंधी विकारों से निपटने के लिए पारंपरिक आहार पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से पुनः संरचित करने की आवश्यकता बताई।
प्रो.मीता कोटेचा ने आयुर्वेद आहार के लिए नियामक दिशानिर्देश और गुणवत्ता मानकों को तय करने की जरूरत पर बल दिया। वहीं, मैसूर स्थित सीएफटीआरआई की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.ललिता गौड़ा ने आयुर्वेदिक आहार की सुरक्षा, मानकीकरण और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता बताई। रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अनुपम श्रीवास्तव ने सीएमई की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि आगामी दिनों में व्याख्यान, प्रदर्शन और संवाद सत्रों के माध्यम से आयुर्वेद आहार के पारंपरिक और आधुनिक दोनों दृष्टिकोणों को समाहित किया जाएगा। यह 6 दिवसीय cme कार्यक्रम रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग तथा स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद आहार को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हुए समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में उसकी प्रभावशील भूमिका को स्थापित करना है।