चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): इस सृष्टि मे जो कुछ दिखाई देता है, वह सब शिव तत्व है। इस संसार मे जो कुछ भी है, उसे बनाने वाला एवं बनने वाला स्वयं परम् शिव है। सृष्टि के निर्माण के समय वही ब्रम्हा पालन के समय विष्णु एवं संहार के समय रूद्र उसी के स्वरूप है। चर-अचर मे जो कुछ है सब वही है। ईश्वर समुद्र के समान है, हर प्राणी बून्द के समान है, ईश्वर अंशी है हर प्राणी अंश है। उक्त गूढ़ विवेचना कथा व्यास वाणी भूषण पण्डित प्रभुशरण तिवाड़ी ने सेहिकलां के शिवालय मंदिर मे चल रहीं श्री शिव महापुराण कथा के सातवे दिवस कथा के उपसंहार पर की। उन्होंने कहां की मनुष्य अपने दायित्व का भली-भांती निर्वाहन करे। सबकी सेवा करते हुए भगवान का स्मरण करें, यही सदमार्ग है। कथा मे भगवान शिव की पूजा की पौराणिक विधि का वर्णन। स्वर्ग-नर्क मे जाने के कारणों सहित अनेक प्रसंग सुनाये गए। इस दौरान भगवान शिव व माता गोरा की मनोहारी सजीव झांकी एवं सुमधुर भजनों की प्रस्तुति सराहनीय रही। कथा के प्रारंभ में यजमान संदीप कुमार शर्मा ने आचार्य सियाराम शास्त्री के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य शिव महापुराण व व्यास पूजन किया। कथा में डॉ.जगदीश शर्मा, श्रीचंद पूनिया, पूर्व सरपंच जगदीश बड़सरा, गजानंद शर्मा, बिहारी लाल शर्मा, अरुण शर्मा, नन्दलाल स्वामी, शिवलाल शर्मा, हजारी लाल शर्मा, अशोक शर्मा, संदीप शर्मा, पवन शर्मा, बुद्धिधर कुलहरी, बाबूलाल शर्मा, राकेश कुमार, अरविन्द शर्मा, रवि वर्मा, जितेंद्र जांगीड, संतोष सिंह शेखावत, मनोज नाय, रतिराम महरिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष मौजूद रहे।
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