राहुल गांधी के एक बयान को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उनके सच्चे भारतीय होने पर सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी की देशभक्ति पर सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उनकी दादी इंदिरा गांधी व पिताजी राजीव गांधी ने देश के लिए शहादत दी है। विदित हो राहुल गांधी ने एक बयान में दावा किया था कि गलवान घाटी में चीन के साथ मुठभेड़ के बाद चीन ने भारत की दो हजार किलोमीटर जमीन पर कब्जा करने के साथ ही भारतीय जवानों को पीटने की बात कही थी। राहुल गांधी के इस बयान को लेकर एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने उन पर मान हानि का दावा किया। निचली अदालत की कार्रवाई को रद्द करने को लेकर राहुल गांधी ने माननीय सुप्रीम कोर्ट का रूख किया तो सुप्रीम कोर्ट ने कारवाई पर रोक लगाने से इंकार तो किया ही अपितु राहुल गांधी के उस बयान को लेकर सख्त टिप्पणी भी की है कि एक सच्चा भारतीय ऐसा बयान कदापि नहीं दे सकता। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान को उचित नहीं माना, तत्पश्चात राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की शहादत का कवच लेकर राहुल के बचाव में आगे आये। देश इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की शहादत का सम्मान करता है, उनकी शहादत पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं उठाया जा सकता लेकिन यह इस बात का सर्टिफिकेट भी नहीं कि राहुल गांधी ऐसे बचकाने बयान दे। राहुल गांधी मोदी सरकार की आलोचना करते करते उस मर्यादा को लांघ गये, जिसके लिए इंदिरा जी व राजीव जी की शहादत भी भूल गये। उनको सोचना होगा कि वह देश के एक सम्मानित नागरिक होने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका में भी है। गांधी परिवार का सदस्य होने का यह मायने नहीं कि इस तरह के अनर्गल बयान दे। देखा जाए तो राहुल गांधी के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद उनमें राजनीतिक परिपक्वता नहीं आई है। अंबानी अंबानी की बात करते करते चुनाव आयोग पर टिप्पणी करने के साथ ही संविधान को खतरे में आने को लेकर मुखर बयान देने लगे लेकिन राहुल गांधी को अपने गिरेबान में झांकना होगा कि आपातकाल किसने लगाया था। राहुल गांधी ने संसद को बाधित करना अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। पूरा देश जानता है कि इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की निर्मम हत्या हुई थी लेकिन उसकी आड़ लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का राहुल गांधी का बचाव करना उनकी मजबूरी को इंगित करता है क्योंकि अशोक गहलोत के राजनीतिक जीवन में यह पहला अवसर है कि उनको कांग्रेस ने हासिए पर धकेल दिया। देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल अपरिपक्व नेतृत्व ढोने को मजबूर है और उसी मजबूरी के चलते अशोक गहलोत का यह बयान आया है।
3/related/default