राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में 6 दिवसीय दो विभागीय सीएमई कार्यक्रम का हुआ समापन

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के शरीर रचना विभाग एवं रस शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित 6 दिवसीय सीएमई (CME) कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ। 25 अगस्त से 30 अगस्त तक चले इस कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और शिक्षकों ने भाग लिया और आयुर्वेद चिकित्सा एवं आहार से जुड़े विविध पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

*शरीर रचना विभाग में “रचना शरीर” विषय पर हुई गहन चर्चा*

शरीर रचना विभाग द्वारा आयोजित सीएमई कार्यक्रम में रचना शरीर विषय पर अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण दिया गया। विभागाध्यक्ष प्रो.सुनील कुमार यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए 15 विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रमुख वक्ताओं में एम्स, दिल्ली की डॉ.अरुंधति शर्मा ने आनुवांशिकी विकारों पर, एम्स जोधपुर के डॉ.दुष्यंत अग्रवाल ने मेडिकल म्यूजियम डेवलपमेंट हेतु प्लास्टिनेशन तकनीक पर व्याख्यान दिया। गोमांतक आयुर्वेदिक कॉलेज, गोवा के प्रिंसिपल डॉ.नीलेश कोर्डे ने त्वचा विकारों पर जानकारी साझा की। इसके अतिरिक्त देहदान, कैडेवरिक डिसेक्शन, रिसर्च की नवीन तकनीक, और प्लास्टिनेशन जैसे आधुनिक शैक्षणिक विषयों पर भी आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ द्वारा जानकारी दी गई। कार्यक्रम में देशभर से कुल 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एवं राजस्थान सरकार के खेल विभाग के बीच एक एमओयू भी हस्ताक्षरित किया गया, जो शारीरिक स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भविष्य के सहयोग को बढ़ावा देगा।

*रस शास्त्र विभाग ने “आयुर्वेद आहार” पर दी वैज्ञानिक दृष्टि*
रस शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित सीएमई “Exploring Ayurveda Aahara: Scientific Insights into Traditional Dietary Practices” विषय पर आयोजित हुई। विभागाध्यक्ष प्रो.अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि इस छह दिवसीय कार्यक्रम में 30 प्रतिभागी प्राध्यापकों ने देश के विभिन्न राज्यों से भाग लिया, जिनमें रसशास्त्र, भैषज्य कल्पना, स्वस्थवृत्त एवं योग विभागों से विशेषज्ञ शामिल थे।
कार्यक्रम में 16 प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा 18 अकादमिक विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। साथ ही 3 प्रायोगिक Hands-on Training सत्र भी आयोजित किए गए। समापन सत्र में प्रो.डीबी नारायण (CSO, Ayurvidye Trust) ने Disease Reduction Claims of Ayurveda Aahara विषय पर जानकारी दी एवं HOSU Similarity & Dissimilarity of Drugs पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने संस्थान की फार्मेसी विजिट की, जहाँ कच्चे माल से लेकर उत्पादन एवं पैकेजिंग की प्रक्रिया को बताया गया। यह सीएमई कार्यक्रम आयुर्वेद आहार की वैज्ञानिक समझ, पोषण मूल्यांकन, आधुनिक तकनीकों, नवाचार, व्यवसायीकरण और वैश्विक अवसरों पर केंद्रित रहा, जो सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

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