*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण की 12वी बार गवाह बनी लाल किले की प्राचीर

AYUSH ANTIMA
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से दिए गये भाषण के एक अंश कि 'घुसपैठिये देश के युवाओं की नोकरी खा रहे हैं' यह उस बात की हताशा को इंगित करता है कि युवाओं को एक करोड़ रोजगार देगी भाजपा सरकार। अपने उस लक्ष्य को प्राप्त न करने को लेकर जिम्मेदार घुसपेठियो को ठहराया जा रहा है। आखिर अब घुसपैठियों को लेकर चर्चा करनी जरूरी हो जाती है। विदित हो देश के बार्डर की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसा तो नहीं कि यह घुसपैठिये उड़कर भारत में आ गये। पिछले 11 सालों से केंद्र में भाजपा काबिज है। क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह बयान उनकी सरकार की नाकामी को उजागर नहीं करता कि बोर्डर की सुरक्षा उनके पास होने के बावजूद अवैध घुसपैठ आखिर क्यों हो रही है, तत्पश्चात यह घुसपैठिये किसके इशारे पर भारतीय युवाओं का रोजगार छीन रहे हैं। राज्यों मे सरकार चाहे भाजपा की हो या अन्य राजनीतिक दलों की, यह उनका भी कर्तव्य बनता है कि आखिर इन घुसपैठियों को आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड व अन्य सरकारी दस्तावेज किसके इशारे पर दिए गये। क्या यह वैध दस्तावेज जारी करने की जिम्मेदारी उन अधिकारियों की नहीं, जिन्होंने देश विरोधी काम किया। उन अधिकारियों की सूची बनाने का काम होना चाहिए, जिनके कार्यकाल में यह दस्तावेज जारी हुए और उन पर कानून सम्मत कार्यवाही होनी चाहिए। देश में भ्रष्टाचार को लेकर बड़े बड़े दावे सुनने को मिलते हैं लेकिन भ्रष्टाचार रूपी कैंसर हमारे सिस्टम में इस कदर फैल चुका है कि यह उस सिस्टम को ही तबाह करेगा क्योंकि कैंसर एक लाइलाज बीमारी है। भारत विश्व शक्ति बनने की और अग्रसर है व शायद आउटर पर खड़ा है लेकिन क्या 80 करोड़ गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगो की फौज के साथ भारत विश्व शक्ति बन पाएगा ? यह 80 करोड़ के आंकड़े सरकारी है क्योंकि भाजपा सरकार यह दावा कर रही है कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व ने देश के गौरवशाली इतिहास को चार चांद लगाने में कामयाबी हासिल की है। रोहगिंयो व घुसपैठियों को देश से बाहर का रास्ता दिखाने के काम में तेजी लाने की जरूरत है। इस रोग को वोट बैंक के राजनीतिक चश्मे से न देखकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा। इस राष्ट्रीय समस्या को लेकर विपक्ष जो हाय तौबा कर रहा है, उसके दबाव मे न आकर इस दिशा में इच्छा शक्ति का इजहार करते हुए अवैध रुप से घुसपैठ को रोकने के साथ ही इनको देश से बाहर निकालने के तात्कालिक उपाय करने होगें। जिस तरह से सिस्टम की खामियों का लाभ उठाकर मुफ्त राशन वितरण प्रणाली का प्रभावशाली लोग जरूरतमंदों का हक छीन रहे हैं, उनकी पहचान कर इस प्रणाली से बाहर करना होगा। राजस्थान की भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में गिव अप अभियान के तहत लाखों लोगों ने इसका लाभ लेना बंद कर दिया है। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुंचे, इसको सुनिश्चित करने की जरूरत है यह तभी संभव हो पाएगा जब सिस्टम में सुधार होगा।

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