वन राज्य मंत्री के आश्वासन के बाद देव डूंगरी मंदिर विवाद में फिलहाल महापंचायत का फैसला स्थगित

AYUSH ANTIMA
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अलवर (ब्यूरो): कुछ दिन पूर्व उमरैण क्षेत्र में स्थित देव डूंगरी स्थित मंदिर के निर्माण को वन विभाग ने वन क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण मानते हुए चल रहे निर्माण कार्य को जेसीबी के द्वारा तोड़ दिया था। लगातार स्थानीय ग्रामीण वन विभाग कि कार्रवाई को लेकर आक्रोशित थे, जिसके चलते उन्होंने मंदिर को दोबारा बनाने के लिए महापंचायत करने का फैसला लिया था। महापंचायत होने से एक दिन पूर्व ही स्थानीय ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा से जाकर मिला। मंत्री शर्मा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि 20 अगस्त तक इंतजार करें, वह मंदिर निर्माण को लेकर कुछ ना कुछ अवश्य करेंगे। स्थानीय भाजपा नेता प्रेम पटेल ने बताया कि देव डूंगरी आज का नहीं बल्कि उनके पूर्वजों के समय से बना हुआ मंदिर है, जिसमें की स्थानीय नागरिकों की गहरी आस्था है। वन विभाग का उसको तोड़ा जाना निश्चय ही गलत है। सरपंच भवेंद्र पटेल ने बताया कि देवडूंगरी मंदिर वन विभाग का तोड़ा जाना स्थानीय लोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं सरपंच निहाल गुर्जर का कहना था कि अगर मंत्री 20 अगस्त तक अपना मंदिर बनवाने का आश्वासन पूरा नहीं करते हैं तो महापंचायत कर देवडूंगरी मंदिर को पूरे जोर-जोर से बनाया जाएगा। वही मंदिर कमेटी के बजरंग पटेल ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा करके इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। वन विभाग ने मंदिर तोड़कर स्थानीय ग्रामीणों की आस्था से खिलवाड़ किया है।यह ग्रामीण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। रामगढ़ के टोडली से आए ब्रह्म मुनि महाराज ने हमारे संवाददाता को बताया कि गुर्जर समाज में ऐसी परंपरा है की सबसे पहले जोधपुर से देवनारायण भगवान के मंदिर से चार ईंटें लाई जाती है और उन्हें मंदिर में स्थापित किया जाता है। उसके बाद ही मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। उनका कहना था कि वन विभाग की कार्रवाई निश्चय ही घोर अपराध है और शास्त्रों के अनुसार ऐसा करना पाप का भागी बनना है।
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