भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का प्राचीन मन्दिर जहां भगवान के मस्तिष्क पर होता है सूर्य की किरणों से तिलक

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा, झेरलीवाला): राजस्थान के जयपुर जिले के महार कलां गांव में भगवान श्री लक्ष्मी-नारायण का एक ऐसा मन्दिर मौजूद है, जहां सूर्य की किरणों से भगवान के मस्तिष्क पर प्रतिदिन स्वत: तिलक होता है। "अपना प्रदेश अपने मन्दिर" नामक अपने अभियान के अंतर्गत इस बार श्रावण मास की हरियाली अमावस्या (24 जुलाई 2025) को राजस्थान के जयपुर जिले की चौमूं तहसील के गांव महार कलां के मन्दिरों में दर्शन-पूजन कर लौटे चिङावा के प्रमुख सामाजिक चिंतक एवं अन्वेषी लेखक महेश कुमार शर्मा "आजाद" ने उपरोक्त बात कही। अन्वेषी लेखक आजाद ने महार कलां स्थित उक्त मन्दिर के वर्तमान पुजारी अरविन्द शर्मा से प्राप्त जानकारी के आधार पर बताया कि 513 साल पुराने इस मन्दिर में साल के 365 दिन प्रातःकाल भगवान सूर्य की किरणें मन्दिर में विराजमान श्री लक्ष्मी नारायण भगवान के मस्तिष्क पर पङती हैं। मन्दिर के पुजारी ने मन्दिर की प्राचीनता से संबंधित प्रमाण स्वरूप मन्दिर के खंभे पर प्राचीन लिपि में अंकित आलेख भी श्री आजाद को दिखाया। यहां मन्दिर के मुख्य सभा मण्डप के सामने हनुमान जी का मण्डप न होकर भगवान गरुड़ का मण्डप है, जिसमें भगवान के सामने सर्प पर बैठे भगवान गरुङ की मूर्ति है, जो शायद ही अन्य किसी जगह पर देखने को मिले। महारकलां गांव में ऊंची पहाड़ियों से घिरे प्राचीन मालेश्वर धाम जाने वाले रास्ते में यह मन्दिर स्थित है। चिङावा निवासी आरआर फिलिंग स्टेशन के प्रोपराइटर राधेश्याम ऑपरेटर भी अन्वेषी लेखक महेश आजाद की इस खोजी यात्रा में प्रसन्न मन से उनके साथ रहे।

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