दीप जले हर घर-आँगन में,
हर घर में उजियारा हो।
समरसता का भाव जगे,
यह दीपोत्सव सब से प्यारा हो॥
लोकल फॉर वोकल हमको,
अब मिलकर यह अपनाना है।
बढ़े हमारे भाई-बहन,
यह संदेश फैलाना है॥
घर का पैसा घर में रहकर,
उनको संबल मिलता है।
आपके घर जब दीप जले,
उनके घर भी दीपक जलता है॥
माटी के जब दीप जलें तो,
खुशबू फैले आँगन में।
मिले रोज़गार स्वजनों को,
शुद्ध प्राण हो प्रांगण में॥
एक छोटा सा यह प्रयास,
रंग बहुत ले आता है।
जो बैठे हैं आस लगाए,
उनका विश्वास जगाता है॥
बढ़ें हमारे कुटीर धंधे,
स्वरोजगार का पर्व सजे।
समाज का जब हर तबका हो आगे,
तब हर चेहरे पर खुशी जगे॥
हर दिन मने दिवाली सबकी,
ऐसा भाव जगाना है।
'अनमोल' देश के कोने-कोने,
स्वावलंबन पहुँचाना है॥