रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): जिले में उर्वरक विक्रेताओं के ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता में वृद्धि के उद्देश्य से आयोजित 15 दिवसीय उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह बुधवार को संपन्न हुआ, जिसमें जालोर जिले की विभिन्न ग्राम सेवा सहकारी समितियों से आए 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीसीबी के प्रबन्ध निदेशक नारायण सिंह, अध्यक्ष डॉ.एमएल तेतरवाल तथा पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ.पवन कुमार पारीक की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन नेहा जांगीड़ द्वारा किया गया। इस 15 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण, उर्वरकों के प्रकार एवं उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैव उर्वरकों का महत्व, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश सहित उर्वरक व्यवसाय से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं कानूनी पहलुओं की जानकारी प्रदान की गई। मुख्य अतिथि नारायण सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उर्वरक विक्रेता किसानों एवं कृषि विशेषज्ञों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। अतः उन्हें अपने तकनीकी ज्ञान में निरंतर वृद्धि करते हुए किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए जागरूक करना चाहिए। डॉ.एमएल तेतरवाल ने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टिकाऊ कृषि एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग अत्यंत आवश्यक है। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ.पवन कुमार पारीक ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना तथा किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए तैयार करना था।
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