बंगाल में बदलाव की बयार

AYUSH ANTIMA
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बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा बहुमत से सत्ता हासिल करने में कामयाब रही है। डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती आजाद भारत के बाद पहली बार भगवामय हुई है। बंगाल में भाजपा की सरकार बनाना मात्र एक संयोग नही बल्कि भाजपा की एक रणनिती के तहत ऐसा संभव हो पाया है कि ममता का किला ध्वस्त करने में भाजपा कामयाब हुई। ममता के सिपहसालारों को भाजपा में शामिल करने के साथ ही बूथ स्तर पर भाजपा को मजबूत करने के साथ ही ममता की तुष्टीकरण की राजनीति को लेकर भाजपा ने इस मुद्दे पर बहुत ही आक्रामक तरीके से प्रचार करने के साथ ही हिन्दुत्व के चेहऱो को चुनाव प्रचार में उतार दिया। भाजपा ने ममता को उसी के हथियारों से खत्म करने का काम किया। भाजपा सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध रूप से रह रहे बंगलादेशियो को बंगाल छोड़ने का स्पष्ट आदेश दे दिया है। यदि वे स्वयं नहीं गये तो सरकार उनको खदेड़ने का काम करेगी। उनके इस बयान ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि अब बंगलादेशी बंगाल में नहीं रह सकते हैं। विदित हो पिछले 15 वर्षों से ममता राज में यह बंगलादेशी नागरिक सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। ममता की तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इनको भारत की नागरिकता के दस्तावेज उपलब्ध करवाने के साथ ही मतदान का अधिकार भी दे दिया गया। एसआईआर के चलते इन बंगलादेशियो के नाम मतदाता सूची से हटाए गये। ममता के राज में जो प्रशासन इनको संरक्षण प्रदान कर रहा था, अब बदली राजनितिक फिजां में वही प्रशासन इनको बंगाल छोड़ने की सलाह दे रहा है। ममता की इस तुष्टिकरण की राजनीति के चलते अब ममता मायावती की तरह राजनीतिक पटल से ओझल होने के कगार पर पहुंच गई है। सनातन धर्म के उत्सवों को लेकर ममता का रवैया ठीक नहीं था व एक खास समुदाय के लोगों के संरक्षण के चलते ममता की यह धारणा थी कि उनको सत्ता से कोई बेदखल नही कर सकता लेकिन शायद ममता भूल गई कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सत्ता की चाबी आम जनता के हाथों में होती है। जनता ने ममता के उस फितूर को निकालने का काम किया कि एक जाति व एक ही समुदाय के वोटों से सत्ता हासिल की जा सकती है। राज धर्म यही है कि सत्ता पर बैठा व्यक्ति सभी जाति व सम्प्रदाय के लोगो का सम्मान करने के साथ ही उनके अधिकारों की रक्षा करे न कि उन पर कुठाराघात करें। अधिकारी की चेतावनी का असर है कि इन बांगलादेशियो ने बंगाल की धरती से पलायन करना शुरू कर दिया है, जिसके कारण बंगाल के मूल नागरिको ने राहत की सांस ली है क्योंकि यह अवैध बंगलादेशी बंगाल के मूल नागरिको के संसाधनों को डकार रहे थे।

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