जयपुर/अजमेर: सुल्तानुल हिंद, ख्वाजा-ए-ख्वाजगां, हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी के सालाना उर्स मुबारक के मौक़े पर ग़ौसे आज़म फ़ाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने एक सख़्त लेकिन संतुलित बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि: “ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का दरबार, मोहब्बत का वह दरबार है, जहां नफ़रत दम तोड देती है।" सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि अजमेर शरीफ़ की दरगाह सदियों से अमन, भाईचारे और ख़िदमते ख़ल्क़ की सबसे बड़ी मिसाल रही है। यहां मज़हब, जाति, भाषा या तबक़े के भेदभाव के बिना, हर इंसान को दुआ, इज़्ज़त और सहारा मिला है। उन्होंने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि दरगाह-ए-ख्वाजा के ख़िलाफ़, नफ़रत फैलाने की कोशिशें, दरअसल भारत की सूफ़ी परंपरा, गंगा-जमुनी तहज़ीब और राष्ट्रीय एकता को चोट पहुंचाने की साज़िश हैं।
उन्होंने कहा कि ख्वाजा ग़रीब नवाज़ ने इस्लाम को तलवार या ज़ोर-ज़बरदस्ती से नहीं, बल्कि अख़लाक़, किरदार और इंसानियत के ज़रिये आम किया। भूखों को खाना खिलाना, ग़रीबों का सहारा बनना, मज़लूम के साथ खड़ा होना और इबादत के साथ समाज सेवा, यही वह पैग़ाम है जिसने करोड़ों दिलों को जोड़ा। युवाओं से विशेष अपील करते हुए सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि आज का सबसे बड़ा “जिहाद” नफ़रत के मुक़ाबले मोहब्बत, जाहिलियत के मुक़ाबले इल्म और ख़ुदग़र्ज़ी के मुक़ाबले ख़िदमत है। ख्वाजा ग़रीब नवाज़ का जीवन, हमें याद दिलाता है कि अच्छा मुसलमान वही है जो अपने पड़ोसी, समाज और देश के लिए फ़ायदेमंद बने।
अंत में उन्होंने देश और समाज के लिए दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह तआला ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के सदक़े हिंदुस्तान को अमन, भाईचारे और आपसी सम्मान का गहवारा बनाए, नफ़रत की राजनीति को नाकाम करे और सूफ़ी विचारधारा को और मज़बूती अता फ़रमाए।