देखो देखो कौन‌ आया

AYUSH ANTIMA
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प्रशासनिक अधिकारियों का प्राथमिक नैतिक दायित्व कानून के शासन की पालना, जनता के प्रति जवाबदेही व सार्वजनिक संसाधनों का उचित उपयोग करना है।‌ किसी भी अधिकारी को निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा करनी चाहिए। इसके साथ ही भ्रष्टाचार से दूर रहकर सुशासन करना उनकी प्राथमिकताएं होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म के नाम पर भेदभाव करना व सभी नागरिकों के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए। किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण सरकार की सामान्य प्रक्रिया होने के साथ ही राजनितिक दबाव की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह भी देखा गया है कि यदि कोई अधिकारी बिना राजनीतिक दबाव के ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन कर रहा है तो निश्चित रूप से उसका स्थानांतरण पक्का है क्योंकि वह स्थानीय नेताओं के दबाव में गलत काम को अंजाम नही देता है। झुंझुनूं जिले की बात करें तो लेख के शीर्षक के अनुसार यदि कोई अधिकारी स्थानांतरित होकर आता है तो‌ देखो देखो कौन आया के उचाव के साथ सबसे पहले उसकी जाति देखी जाती है और जाति के आधार पर उसका महिमा मंडन शुरू हो जाता है। अनेक सामाजिक व धार्मिक संगठनों के सरमायेदार माला, दुपट्टा और साफा लेकर गर्मजोशी से स्वागत करते है। राजनीतिक लोगो का तो इन अधिकारियों से काम पड़ता है क्योंकि वे अपने राजनीतिक रसूख का फायदा अपने निजी स्वार्थ के लिए करते हैं लेकिन सार्वजनिक व धार्मिक संगठनो का आगुंतक अधिकारी के आफिस के बाहर गुलदस्ता, साफा व फूल-मालाएं लिए खड़े रहना कोतूहल पैदा करता है। सरकारी अधिकारी को जैसे कहा कि जाति व धर्म से उपर उठकर अपने कर्तव्य का पालन करना होता है लेकिन उसमें जातिवाद का तड़का नहीं लगाना चाहिए।

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