सनातन धर्म को कमजोर करने के लिए हो रहे सुनियोजित षड़यंत्र मे भारतीय फिल्म उद्योग का विशेष योगदान रहा है। अनेकों फिल्मों मे केवल एक धर्म विशेष को महिमान्वित करने का काम देखा गया है। घूसखोर पंडित नामक फिल्म उसी षड़यंत्र का एक हिस्सा है। भारतीय संस्कृति में पंडित का महत्वपूर्ण दर्जा भी है। सनातन समाज में पंडित को विद्वान की संज्ञा दी गई है। देखा जाए तो यह अलंकरण विप्र समाज के लिए सम्मानजनक माना जाता है। मनोज बाजपेई ने विप्र समाज की अस्मिता पर प्रहार करने की कुचेष्टा की है। पंडित को लेकर अमर्यादित शब्दावली का प्रयोग विप्र समाज को नीचा दिखाने का जो काम किया है, उसको लेकर विप्र समाज में आक्रोश है। देश में जाति सूचक शब्द बोलने पर सजा का प्रावधान है लेकिन खुलेआम विप्र समाज को लेकर जो अपमानित किया जा रहा है, उसको लेकर शायद ही कोई कानूनी प्रावधान हो। एक तरफ जातिवाद से उपर उठकर विराट हिन्दू सम्मेलनो का आयोजन हो रहा है कि सभी सनातनियों को जातिवाद से उपर उठकर केवल सनातनी होने का संचार प्रयास करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कहा जा सकता है, दूसरी तरफ मनोज बाजपेई जैसे सनातन विरोधी कृत्य कर सामाजिक समरसता को खत्म करने का कथित प्रयास कर रहे हैं। देखा जाए तो भारतीय फिल्म उद्योग ने जितना सनातन धर्म पर प्रहार और उसकी परम्पराओं का मज़ाक़ उड़ाया है, उसको लेकर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। क्या मनोज बाजपेई किसी अन्य धर्म को लेकर ऐसा टाईटल व डायलॉग बोलने की हिम्मत कर सकता है। यदि उसने किसी विशेष धर्म समुदाय को लेकर ऐसा दुस्साहस किया होता तो अभी तक सर कलम का फतवा जारी हो जाता। यह सनातन धर्म के विशाल हृदय का परिचायक है कि इतना होने के बावजूद मनोज बाजपेई को अपनी बात रखने का मौका दिया जा रहा है। साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की जो मंशा मनोज बाजपेई ने विप्र समाज पर प्रहार करने का जो दुस्साहस किया है, उसका पूरे देश में विरोध हो रहा है। देखा जाए तो फिल्म सैंसर बोर्ड भी इसका दोषी है। केन्द्र में सनातन धर्म की पोषक सरकार विराजमान हैं और उसी सरकार के द्वारा मनोनीत सैंसर बोर्ड इसकी इजाजत दे रहा है तो प्रश्नचिन्ह उठने लाजिमी है। इस कृत्य के लिए मनोज बाजपेई से ज्यादा सेंसर बोर्ड दोषी है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए कि किसके दबाव में इस फिल्म के टाईटल की इजाजत दी है। अखिल भारत हिन्दू महासभा इसका पूरजोर विरोध करती है कि इस फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए व सैंसर बोर्ड पर कारवाई की जाए। इसके साथ ही अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद (रजि) देश में जितने भी विप्र समाज के संगठन है, उनसे अपील व आह्वान करती है कि तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाए, जिससे भविष्य में कोई भी विप्र समाज की अस्मिता से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न करें।
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