यह आमजन में चर्चा का विषय रहता है कि भ्रष्टाचारी नेता भाजपा की वाशिंग मशीन से बिल्कुल पाक साफ हो जाता है लेकिन इन आरोपो के बावजूद अपवाद के रूप में कांग्रेस शासन मे एक भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। कांग्रेस सरकार के गृह राज्य मंत्री राजेन्द्र यादव के दोनों पुत्रों के साथ साथ उनके रिश्तेदारों के विरूद्ध एसीबी ने करोड़ो रूपये के भ्रष्टाचार को लेकर कार्यवाही की है। इन्हें कांग्रेस शासन मे हुए दो हजार करोड़ रुपए के मिड डे मील घोटाले का आरोपी बनाया है। एसीबी ने सहकारिता क्षेत्र की संस्था कानफैड, मिड डे मील से जुडे शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और फूड पैकेट सप्लाई करने वाली फर्मों के इक्कीस लोगों को भी नामजद किया है। यह घोटाला कोविड काल का है, जब देश में सारे स्कूल बंद थे। उस समय अंतराल में मिड डे मील योजना के तहत 62 लाख 67 हजार विद्यार्थियों को 3 करोड़ 12 लाख पैकेट वितरण करना दिखाया गया लेकिन यह सिर्फ कागजो तक ही सीमित रहा। जांच पड़ताल में यह भी सामने आया कि इतना बड़ा घोटाला बिना राजनेता व उच्च अधिकारियों के संरक्षण बिना संभव नहीं हो सकता है। कांग्रेस शासन मे मंत्री रहे राजेन्द्र यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के उस बयान की पुष्टि करता है कि भ्रष्टाचारी चाहे कितना ही रसूखदार हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। राजेन्द्र यादव ने अपने खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया था व भाजपा को सुरक्षित स्थान मान रहे थे लेकिन शायद राजेन्द्र यादव भूल गये कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भ्रष्टाचारियो के खिलाफ मुहीम छेड़ रखी है। राजेन्द्र यादव का भाजपा में जाने को लेकर आरोप लगा रही थी कि कारवाई से बचने के लिए भाजपा रुपी वाशिंग मशीन का सहारा लिया है क्योंकि बड़े बड़े भ्रष्टाचारी भाजपा में जाने के बाद पाक साफ हो गये। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस शासन के खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपनी आपत्ति जताई थी कि खाद्य सामग्री की खरीद उनका विभाग करता आया है। ऐसे में कानफैड से फूड पैकेट खरीदना गलत है। खाचरियावास ने खरीद में हो रही गड़बड़ी का तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संज्ञान में लाने का काम किया था लेकिन अशोक गहलोत ने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया था। उपरोक्त तथ्यों से यही उजागर होता है कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ रहा है। कांग्रेस शासन के मंत्री ने नौनिहालों के मुंह से निवाला छीना है लेकिन खाचरियावास की चेतावनी के बावजूद अशोक गहलोत की चुप्पी कही न कही शक की सुई की तरफ इशारा कर रही है।
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