निवाई (लालचंद सैनी): पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) ने सीदड़ा गांव में खुदाई के दौरान मिले कथित खजाने (सिल्वर डेग) के मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह कोई दैवीय चमत्कार या ऐतिहासिक खजाना नहीं, बल्कि ठगी का एक सुनियोजित षड्यंत्र था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अघोरी तांत्रिक और उसके भतीजे को गिरफ्तार कर उनके पास से 5 किलो नकली सोने की ईंटें और बिस्कुट बरामद किए हैं।
*ऐसे हुआ पर्दाफाश*
जिला स्पेशल टीम (DST) प्रभारी ओम प्रकाश ने बताया कि 3 जनवरी को सीदड़ा गांव के एक खेत में संदिग्ध गड्ढे और भारी भीड़ जमा होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से खुदाई करवाई, जिसमें एक लोहे जैसी धातु की डेग (चरा) मिली। इसे सुरक्षित ट्रेजरी में रखवाया गया था। मामले की गहनता से जांच के लिए टीम गठित की गई, जिसने संदिग्ध मुकेश अघोरी (32) पुत्र तेजाराम मीणा और उसके भतीजे अभिषेक (24) पुत्र कैलाश चंद मीणा (निवासी जयनारायण की ढाणी, सीदड़ा) को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
*अंधविश्वास की आड़ में ठगी का खेल*
पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे तांबे की धातु पर सोने की परत (पानी) चढ़ाकर उसे जमीन में गाड़ देते थे। इसके बाद भोले-भाले लोगों को फंसाने के लिए तंत्र-मंत्र का ढोंग रचते और जमीन में दबाया हुआ वह बर्तन (डेग) निकाल लेते थे। आरोपी नकली सोने की ईंट और बिस्कुट को असली बताकर लोगों को ठगते थे। यदि बाद में कोई शिकायत करता कि सोना नकली है, तो आरोपी बड़ी चालाकी से कह देते थे कि "तंत्र विद्या कमजोर रह गई होगी, इसलिए सोना बदल गया।" पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे 5 किलो नकली सोना (ईंट व बिस्कुट) जब्त किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन ठगों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।