झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा झूंझुनू जिला मुख्यालय पर 29 दिसंबर को जनसंवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ओबीसी आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि सूचना केंद्र सभागार, झुंझुनूं में राज्य ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग सदस्य के रूप में पवन सैनी मावंडिया एवं एडवोकेट गोपाल कृष्ण शर्मा उपस्थित रहे। परिचर्चा कार्यक्रम में ओबीसी श्रेणी के भीतर वर्गीकरण किए जाने, जनसंख्या के अनुपात में सीटों का निर्धारण करने, पिछड़ी एवं अतिपिछड़ी जातियों को आरक्षण का पूर्ण लाभ दिलाने तथा वर्तमान 21 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने की मांग झुंझुनूं में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उठी। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने इन विषयों पर अपने विचार साझा किए।
*पंचायती राज व नगर निकाय चुनावों में आरक्षण पर हुई चर्चा*
परिचर्चा के दौरान जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं आमजन ने पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण को लेकर आयोग के समक्ष अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि न्यायसंगत आरक्षण व्यवस्था से ही सामाजिक संतुलन और वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकता है।
*राजनीतिक व सामाजिक संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी*
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष बनवारी लाल सैनी, जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी कैलाश यादव, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु सिंह, बुहाना के पूर्व प्रधान चौधरी हरपाल सिंह, नेशनल जन मंडल पार्टी के अध्यक्ष दौलत राम पेंसिया, जिला माली सैनी समाज के जिलाध्यक्ष महेन्द्र शास्त्री, कुम्हार कर्मचारी सेवा समिति के जिलाध्यक्ष हरिराम दादरवाल, भाजपा नेता इंद्राज सैनी, कांग्रेस ओबीसी विभाग के जिलाध्यक्ष संतोष सैनी, मेहरा समाज के प्रदेशाध्यक्ष सीताराम मेहरा, सैन समाज के जिलाध्यक्ष डॉ.बीएल वर्मा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष मदन लाल सैनी, माकपा जिला सचिव महिपाल पूनिया, भाजपा जिला मंत्री नीता यादव, पूर्व जिला परिषद सदस्य बजरंग लाल जांगीड, एडवोकेट रतन लाल मोरवाल, राजेश जांगीड, डॉ.श्रवण सैनी, डॉ.सोमदत्त यादव, नरेश सोनी, देवीदत्त भार्गव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
*आयोग ने सुझावों को गंभीरता से सुना*
जन संवाद में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपने सुझाव आयोग के समक्ष रखे। आयोग सदस्यों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें अभिलेख में दर्ज करने का आश्वासन दिया।